Saturday, 27 December 2014

II पूर्वांचल राज्य बनावल काहे जरुरी बा II 
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पूर्वांचल के लोग उत्तरप्रदेश में शुरुए से उपेक्षित रहल बा I अब त हमनी के पहचानो ख़तम होखे के कागार पर पहुँच चुकल बा – कतही हमनी के बिहारी कहल जाला त कतही भईया I केहू केहू के त सोच अईसन बा की उ हमनी के उनकर बोझा ढोवे वाला मजदुर भ कुलिये बुझे ला लो I अईसन काहे होला की जदी हमनी के आपस में भोजपुरी में बातकही करी ले त लोग सक के नज़र से घूरे ला I भोजपुरी भाषाई परिवार के स्तर प एगो आर्य भाषा ह , हमानी के बहुत उन्नत सभ्यता आ संस्कृति रहल बा I भारत के जनगणना आँकडा के अनुसार भारत में लगभग 3.3 करोड़ लोग भोजपुरी बोलेला। पूरा विश्व में भोजपुरी जाने वालन क संख्या लगभग 5 करोड़ बा । तबो भोजपुरी भाषा आजले उपेक्षित बाटे I इहे ना भोजपुरी के उपेक्षा के चलते लोकसंगीत और लोकगायक धीरे धीरे ख़तम के कागार ले पहुँच चुकल बड़े I 
हमार पूर्वांचल में पॉलिटिक्स रग रग में खून बनके दउड़े ला I इहवा से केतना बड़ बड़ नेता निकलल हउवे ...तबो इस क्षेत्र के बिकाश खातिर कुछो खास ना कईल गईल I कउना चलते ,जवन पूर्वांचल के लोग नेता सन के विधान सभा ,लोकसभा आ राज्य सभा भेजलन ,उ आम लोगन के आज दुर्गति होता I लोग भुखमरी के कागार ले पहुँच चुकल बाड़े I आज ले कउनो नेता अईसन कुछो पहल नईखन कईले,इहाँ इंडस्ट्री भ उद्द्योग धंदा लगावे के ,आ ना आपन ध्यान दिहले इहाँ के समस्यन प I इहाँ बेरोजगारी दिन दुना रात चउगुना के हिसाब से बढ़ ता I इहाँ के नवयुवकन के लगे ना रोजगार बाटे आ ना धन बा ,की कउनो आपन रोजगार शुरू कर सकस I कहल जाला नु खली दिमाग शैतान क घर होला ,त लउकतो बा ...आजकाल्ह छिनताई ,चोरी,लुट मार खूब बढ़ल बा इ क्षेत्र में I जउन लोग हिम्मत कके बहार रोजगार के सिलसिले में जातो बा लो उनकर हालत इ बा की आमदनी अठन्नी अउर खर्चा रुपईया I बेचारा करलो त का ...जहाँ काम धन्दा करता लो उहां रहे खाए के खर्च त बढ्लही बा आ घरो प माई बाउजी के देखे पड़े ला ...घरो के सगरे खर्च उठावे के बादो कुछू बचबे ना करेला I करस त का करेस ???
किसानन के हालत केहू से लुकाईल नईखे I किसानी कइल सबके बस के बातो नईखे रहल I ना फायेदा मिलेला आ ना ठीक खेतिये हो पावे ला I बरखा ना होखे त सुखा ,बरखा होखे त बाढ़ ...का करेलो हमानी के अन्नदाता I बाढ़ आवे ला गांव के गांव बहा ले जाला ...सरकार के कुछू नेता दउरा प दउरा करके चल जाला लो ...कुछो दया आ गईल त कुछू अनुदान राशी बाँट दिहल जाला ....ना त खाली तमासा बनके रह जालन किसान भाई ...अईसन कहे बा ??
हाथकला त पूछी मत ....इहवे के लोग एके भुला दिहल लो ? काहे भोरपारा दिहल लो भाई ...कहेकि हाथ से बनल समान अब बाजार में ना बेचाला ...कहेकि एकर कउनो प्रचार प्रसारो नईखे कईल गईल सरकार के ओर से I एहिसे लोग धीरे धीरे आपन पुस्तैनी कार(काम) क छोड़ छाड़ के दोसर शहरन में कार करे पड़ता I सरकार चाहित त का ना कर सकत रहे I सरकार कउना चलते इ उपेक्षा(भेदभाव) कर रहल बिया ?

हम बाहर के शहर में राज्यों में जानी सन ,उहा हमनी मेहनत से छोट मोट उद्द्योग धंधा फलत फूलत -बड़ बड़ उद्द्योग धंधा बन जाता ...शहरन के चमक बढ़ जाला ...राज्यन के विकाश दर बढ़ जाला I त का हम आपन शहरन आ गावन में उ चमक नईखी लिया सकत सन ? बिलकुल लिया सकेनी सन , जवन कार (काम) हम बाहर के शहरन में करीले सन उ कार हमनी के आपन शहर आ गांव के लगे मिले त हमार शहर आ गांवो चमक उठी I बाकिर राजनैतिक उदाशीनता के चलते हमार पूर्वांचल विकाश नईखे कर पावत I उद्द्योग पति इहवा नईखे आवल चाहत ! कहेकि उनके इहाँ के कानून व्यवस्था प भरोसा नईखे I इहाँ बिजली के खमा त लउक जाई बाकिर ओहि पर टांगल तारन में कबो कबारे करंट दउड़े ला I सड़क अईसन बा की ट्रक के टंगडियो टूट जाए ,साइकिल के का मजाल I कानून व्यवस्था अईसन बा की पुलिश आ दरोगो के आपन सुरक्षा के जरुरत महसूस होखे लागे ला काहेकि उहो अपना के शेफ महसूस नईखे करत लो ! अब सोचि जा जहवा पुलिश लो सुरक्षित नईखन ...उहा हमार आ राउर का अउकात बा I 
जब साहब कानून व्यवस्था ठीक नईखे अउर रोजगार खातिर मारा मारी होखे त खेल कूद भ स्पोर्ट्स के छोड़े दी I जदी नउजवान के सारा ध्यान बाहर के सहारा आ देशों में जाके रोजगार करे में लगल रही त का खाक हमेनी के नेशनल और इंटरनेशनल प्लेयर मिली I हमनी के बच्चन में प्रतिभा के कवनों कमी नईखे तबो उनकर सोझा समस्या इ बा की भूखल पेट खेल कूद नईखे होत साहब I 
रहल बात एजुकेशन के ..उ त जगजाहिर बा सरकार के नीतियाँ I इस्कुलन में आजकाल्ह खली खायेक खियावल जाला ..बच्चवनों खिचड़ी के चक्कर में इस्कूल हो आवे ले I अब केतना अउर बढ़ाई कईल जाव रउआ लो समझदार बनी बुझ सके नी I जे पइसा वाला बाड़े उनकर बच्चा बड़हन बड़हन इस्कूल में पढ़ लिख आवे ले ....गरीबन के बच्चा क के पूछे ला ? आज सरकारी इस्कूल से पढ़ल बच्चा अंग्रेजी के फॉर्म तक नईखन भर पावत ....का हमनी उके खाली साक्षर बनावतनी सन ..खाली सिक्षा में साक्षरता दर देखावे खातिर ? सोचेम जरुर !!
का उपरोक्त सभ समस्या के कारण खाली इतने बा की हमनी भोजपुरी भासी आ पूर्वांचली हई ????
एक बार फेर से सोची तानी ....का हमनी के मांग नाजाईज बा ...का हमनी के विकाश, उन्नति, रोजगार, अच्छा क़ानून व्यवस्था ना चाही I का हमनी के 24 घंटा बिजली ना मिले के चाही I हमनी के जवान पहचान बा ओकरा के अईसही ख़तम होखे दिहल जाई I हमनी के मुख्य मांग बा की हर पूर्वांचली के रोजगार मिले ,उनकरो अच्छा शिक्षा दीक्षा मिले, कम से कम सारा ईस्कुलन के सीबीएसई पैटर्न के हिसाब से स्टैण्डर्ड तय कईल जाए I किसानो की हालत में सुधार हो ,अच्छा क़ानून व्यवस्था लागु हो ...सभे लोग सुख शांति से रहें ..केहू के घर दुआर छोड़के बहरी जाके नउकरी चाकरी करे के जरुरत ना पड़े II.......................


 धन्यवाद 





आशुतोष सिंह कौशिक,


 राष्ट्रिय उपाध्यक्ष 


(पूर्वांचल राज्य मोर्चा).

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